उपनिषद वेदों का सार और दार्शनिक शिखर हैं। “उपनिषद” शब्द का अर्थ है — गुरु के समीप बैठकर प्राप्त किया गया गूढ़ ज्ञान। उपनिषदों में आत्मा, परमात्मा, ब्रह्म, मोक्ष और जीवन के अंतिम सत्य का गहन विवेचन किया गया है।
उपनिषद यह सिखाते हैं कि—आत्मा न जन्म लेती है, न मरती है; वह सदा अमर है। ये ग्रंथ मानव को भौतिक संसार से ऊपर उठाकर आत्मिक चेतना की ओर ले जाते हैं। उपनिषदों का उद्देश्य है—
परंपरागत रूप से 108 उपनिषद माने जाते हैं, जिनमें से 10–13 प्रमुख उपनिषद अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
उपनिषदों के चार प्रमुख महावाक्य—
ये महावाक्यआत्मा और परमात्मा की एकता का बोध कराते हैं।
उपनिषद बताते हैं कि मोक्ष कर्म या भोग से नहीं, बल्कि ज्ञान और आत्मबोध से प्राप्त होता है।मोक्ष का अर्थ है-
आज के युग में भी उपनिषद मानसिक शांति, आत्मसंयम और जीवन के सही उद्देश्य को समझने में सहायक हैं। ये हमें सिखाते हैं कि— सच्चा सुख बाहर नहीं, भीतर है।
उपनिषद मानव आत्मा को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले ग्रंथ हैं।